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प्राचीन आविष्कार जिनका उपयोग आज भी किया जाता
हम एक बेहद उन्नत तकनीकी युग में जी रहे हैं। आप जो भी सोच सकते हैं, वह गूगल पर एक त्वरित खोज से मिल जाता है। हालांकि हमारी अधिकांश तकनीक 18वीं और 19वीं शताब्दी की औद्योगिक क्रांति के बाद विकसित हुई है, लेकिन आज हम जिन उत्पादों का उपयोग करते हैं, उनका इतिहास कहीं अधिक पुराना है। आज के कई लोकप्रिय विचार, उपकरण और यहां तक कि खाद्य पदार्थ भी प्राचीन काल से जुड़े हुए हैं।
आइए कुछ प्राचीन आविष्कारों के बारे में जानें जो आज भी आधुनिक जीवन का हिस्सा हैं।
डिजिटल इंडिया
यह योजना ई-गवर्नेंस, डिजिटल सेवाएँ, कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देती है। डिजिटल इंडिया भारत सरकार की एक बड़ी पहल है, जिसे 1 जुलाई 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉन्च किया था, जिसका लक्ष्य भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना है, जिसके मुख्य स्तंभ हैं डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल रूप से सेवाएं प्रदान करना और नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण। यह पहल तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी, ई-गवर्नेंस सेवाओं, डिजिटल साक्षरता और भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है, जिससे सभी नागरिकों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से सरकारी सेवाओं तक पहुँच मिल सके।
मिनिमल लाइफस्टाइल: कम में ज्यादा खुशी
यहीं से शुरू होती है मिनिमल लाइफस्टाइल, यानी कम में संतुष्टि और सुकून।
मिनिमल लाइफस्टाइल क्या है?
मिनिमल लाइफस्टाइल का मतलब अभाव में जीना नहीं, बल्कि ज़रूरत और चाहत में फर्क समझना है। जो चीज़ें हमारी ज़िंदगी में सच में काम की हैं और खुशी देती हैं, उन्हें अपनाना—और बाकी अनावश्यक बोझ को छोड़ देना। मिनिमलिज्म यानी कम-से-कम का उद्देश्य केवल भौतिक वस्तुओं से नहीं, बल्कि विचार, समय और ऊर्जा का भी समझदारी से प्रबंधन करना है। यह सुरक्षा, व्यक्तिगत संतोष और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने में मदद करता है, जिससे आप को जीवन अर्थपूर्ण लगता है।
लोहड़ी
इस पर्व की रात्रि में किसी खुले स्थान में परिवार एवं आस-पड़ोस के लोग मिलकर आग के किनारे घेरा बनाकर बैठते हैं तथा इस समय रेवड़ी, मूंगफली, लावा आदि खाकर पर्व मनाते हैं।
लोहड़ी पौष के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद (माघ संक्रांति से पहली रात) यह पर्व मनाया जाता है। यह प्रायः 12 या 13 जनवरी को पड़ता है। यह द्योतार्थक (एक्रॉस्टिक) शब्द लोहड़ी की पूजा के समय व्यवहृत होने वाली वस्तुओं के द्योतक वर्णों का समुच्चय जान पड़ता है, जिसमें ल (लकड़ी) +ओह (गोहा = सूखे उपले) +ड़ी (रेवड़ी) = 'लोहड़ी' के प्रतीक हैं। श्वतुर्यज्ञ का अनुष्ठान मकर संक्रांति पर होता था, संभवतः लोहड़ी उसी का अवशेष है। पूस-माघ की कड़कड़ाती सर्दी से बचने के लिए आग भी सहायक सिद्ध होती है-यही व्यावहारिक आवश्यकता 'लोहड़ी' को मौसमी पर्व का स्थान देती है।
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डिजिटल इंडिया
यह योजना ई-गवर्नेंस, डिजिटल सेवाएँ, कनेक्टिविटी और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देती है। डिजिटल इंडिया भारत सरकार की एक बड़ी पहल है, जिसे 1 जुलाई 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉन्च किया था, जिसका लक्ष्य भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलना है, जिसके मुख्य स्तंभ हैं डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल रूप से सेवाएं प्रदान करना और नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण। यह पहल तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी, ई-गवर्नेंस सेवाओं, डिजिटल साक्षरता और भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है, जिससे सभी नागरिकों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से सरकारी सेवाओं तक पहुँच मिल सके।
प्राचीन आविष्कार जिनका उपयोग आज भी किया जाता
हम एक बेहद उन्नत तकनीकी युग में जी रहे हैं। आप जो भी सोच सकते हैं, वह गूगल पर एक त्वरित खोज से मिल जाता है। हालांकि हमारी अधिकांश तकनीक 18वीं और 19वीं शताब्दी की औद्योगिक क्रांति के बाद विकसित हुई है, लेकिन आज हम जिन उत्पादों का उपयोग करते हैं, उनका इतिहास कहीं अधिक पुराना है। आज के कई लोकप्रिय विचार, उपकरण और यहां तक कि खाद्य पदार्थ भी प्राचीन काल से जुड़े हुए हैं।
आइए कुछ प्राचीन आविष्कारों के बारे में जानें जो आज भी आधुनिक जीवन का हिस्सा हैं।
लोहड़ी
इस पर्व की रात्रि में किसी खुले स्थान में परिवार एवं आस-पड़ोस के लोग मिलकर आग के किनारे घेरा बनाकर बैठते हैं तथा इस समय रेवड़ी, मूंगफली, लावा आदि खाकर पर्व मनाते हैं।
लोहड़ी पौष के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद (माघ संक्रांति से पहली रात) यह पर्व मनाया जाता है। यह प्रायः 12 या 13 जनवरी को पड़ता है। यह द्योतार्थक (एक्रॉस्टिक) शब्द लोहड़ी की पूजा के समय व्यवहृत होने वाली वस्तुओं के द्योतक वर्णों का समुच्चय जान पड़ता है, जिसमें ल (लकड़ी) +ओह (गोहा = सूखे उपले) +ड़ी (रेवड़ी) = 'लोहड़ी' के प्रतीक हैं। श्वतुर्यज्ञ का अनुष्ठान मकर संक्रांति पर होता था, संभवतः लोहड़ी उसी का अवशेष है। पूस-माघ की कड़कड़ाती सर्दी से बचने के लिए आग भी सहायक सिद्ध होती है-यही व्यावहारिक आवश्यकता 'लोहड़ी' को मौसमी पर्व का स्थान देती है।
मिनिमल लाइफस्टाइल: कम में ज्यादा खुशी
यहीं से शुरू होती है मिनिमल लाइफस्टाइल, यानी कम में संतुष्टि और सुकून।
मिनिमल लाइफस्टाइल क्या है?
मिनिमल लाइफस्टाइल का मतलब अभाव में जीना नहीं, बल्कि ज़रूरत और चाहत में फर्क समझना है। जो चीज़ें हमारी ज़िंदगी में सच में काम की हैं और खुशी देती हैं, उन्हें अपनाना—और बाकी अनावश्यक बोझ को छोड़ देना। मिनिमलिज्म यानी कम-से-कम का उद्देश्य केवल भौतिक वस्तुओं से नहीं, बल्कि विचार, समय और ऊर्जा का भी समझदारी से प्रबंधन करना है। यह सुरक्षा, व्यक्तिगत संतोष और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने में मदद करता है, जिससे आप को जीवन अर्थपूर्ण लगता है।
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